रिद्धि

“लास्ट सीन ऑनलाइन”

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रिद्धि शर्मा – 24 साल की क्राइम पॉडकास्ट क्रिएटर, जो इंटरनेट पर अनसुलझे केसों पर वीडियो बनाती है और अपने डर को मजाक में छिपाने की आदत रखती है।

अर्णव सूद – 27 साल का वीडियो एडिटर और रिद्धि का एक्स बॉयफ्रेंड, जिसने ब्रेकअप के बाद भी कभी उसका साथ पूरी तरह नहीं छोड़ा।

इंस्पेक्टर नीरज सिंह – साइबर क्राइम ऑफिसर, जिसे हमेशा लगता है कि हर डिजिटल चीज़ के पीछे इंसानी लालच छिपा होता है।

दिल्ली की सर्द रात थी और बाहर इतनी धुंध थी कि सामने खड़ी कार का नंबर तक साफ दिखाई नहीं दे रहा था। रिद्धि अपने स्टूडियो में अकेली बैठी लैपटॉप पर नया पॉडकास्ट रिकॉर्ड कर रही थी, लेकिन उस रात उसकी आवाज़ में पहली बार हल्का डर महसूस हो रहा था।

उसका नया एपिसोड एक ऐसे सीरियल किलर पर था जो अपने शिकारों को मारने से पहले उन्हें सिर्फ एक मैसेज भेजता था — “लास्ट सीन ऑनलाइन।”

पुलिस को आज तक ना उसका चेहरा मिला था, ना कोई फिंगरप्रिंट, सिर्फ हर क्राइम सीन पर बंद पड़ा एक मोबाइल फोन मिलता था। 

रिद्धि ने रिकॉर्डिंग रोककर कॉफी उठाई ही थी कि उसके फोन पर अचानक वही मैसेज आया — “लास्ट सीन ऑनलाइन।” कुछ सेकंड तक वो स्क्रीन को घूरती रही क्योंकि ये वही लाइन थी जो सिर्फ पुलिस फाइल्स में मौजूद थी और इंटरनेट पर कभी लीक नहीं हुई थी।

उसने तुरंत नंबर कॉल किया लेकिन दूसरी तरफ सिर्फ धीमी सांसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। फिर अचानक किसी आदमी ने बहुत धीरे से कहा — “तुम्हें दूसरों की कहानियां सुनाना पसंद है… अब अपनी कहानी सुनो…”

रिद्धि का गला सूख गया और उसने तुरंत कॉल काट दिया। उसने खुद को समझाने की कोशिश की कि शायद कोई बीमार फैन मजाक कर रहा है, लेकिन उसके हाथों की हल्की कंपकंपी बता रही थी कि अंदर ही अंदर वो डर चुकी है। उसी समय स्टूडियो की सारी लाइट्स एक सेकंड के लिए बंद हुईं और फिर अचानक वापस जल उठीं। लेकिन इस बार उसके लैपटॉप स्क्रीन पर रिकॉर्डिंग सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि उसका खुद का बेडरूम लाइव दिखाई दे रहा था। कैमरा एंगल ऐसा था जैसे किसी ने उसके कमरे में छिपकर कैमरा लगाया हो।

रिद्धि की सांसें तेज हो गईं क्योंकि स्क्रीन पर उसका कमरा खाली था, लेकिन अगले ही पल अलमारी के अंदर कुछ हल्का सा हिलता हुआ दिखाई दिया।

वो डरते हुए घर के अंदर दौड़ी और सीधे बेडरूम का दरवाजा खोला। कमरा बिल्कुल शांत था, सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन अलमारी के नीचे से किसी के जूतों की हल्की परछाईं साफ नजर आ रही थी।

रिद्धि चीखते हुए पीछे हटी और उसी समय अलमारी का दरवाजा धीरे-धीरे खुला। लेकिन अंदर कोई आदमी नहीं था… सिर्फ एक फोन रखा था जिसकी स्क्रीन पर उसकी बचपन की फोटो खुली हुई थी।

उस फोटो के नीचे एक लाइन लिखी थी — “तुम्हें बचपन से देख रहा हूं…” रिद्धि के पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि वो तस्वीर कभी सोशल मीडिया पर अपलोड ही नहीं हुई थी। उसने तुरंत अर्णव को कॉल किया और कांपती आवाज़ में सब कुछ बताया।

अर्णव बिना एक सेकंड गंवाए उसकी लोकेशन पर पहुंचा क्योंकि वो जानता था कि रिद्धि आसानी से डरने वालों में से नहीं है। दोनों ने पूरा घर चेक किया लेकिन कहीं कोई नहीं मिला। फिर अर्णव की नजर दीवार पर लगे पुराने फोटो फ्रेम पर गई, जो हल्का सा टेढ़ा था जैसे किसी ने अभी-अभी उसे छुआ हो।

जैसे ही उसने फ्रेम हटाया, पीछे एक छोटा हिडन कैमरा लगा हुआ दिखाई दिया।

रिद्धि की आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था क्योंकि इसका मतलब था कि कोई महीनों से उसकी जिंदगी को चुपचाप देख रहा था।

अचानक रिद्धि के लैपटॉप पर अपने आप एक वीडियो प्ले होने लगा। वीडियो में रिद्धि खुद सड़क पर चलती दिखाई दे रही थी, कैफे में बैठती दिखाई दे रही थी, यहां तक कि सोते हुए भी रिकॉर्ड की गई थी।

वीडियो के आखिर में स्क्रीन ब्लैक हुई और फिर एक आदमी का मास्क पहना चेहरा दिखाई दिया।

उसने कैमरे के बेहद करीब आकर सिर्फ इतना कहा — “तुम अगली हो…”

अर्णव तुरंत रिद्धि को लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचा और इंस्पेक्टर नीरज को सारी बात बताई।

लेकिन नीरज का चेहरा अचानक गंभीर हो गया क्योंकि ठीक इसी तरह के वीडियो पिछले तीन मर्डर केसों में भी मिले थे।

नीरज ने बताया कि किलर अपने शिकार को पहले महीनों तक स्टॉक करता है।

वो उनकी आदतें सीखता है, उनके डर समझता है और फिर एक रात अचानक उन्हें गायब कर देता है।

रिद्धि पहली बार पूरी तरह टूटती हुई दिखाई दी क्योंकि अब ये कोई इंटरनेट प्रैंक नहीं था।

किसी ने सच में उसकी जिंदगी को अपना अगला खेल बना लिया था।

उस रात पुलिस ने रिद्धि के घर के बाहर सिक्योरिटी लगा दी लेकिन फिर भी उसे नींद नहीं आ रही थी।

करीब तीन बजे अचानक उसके फोन पर एक नोटिफिकेशन आया — “तुम्हारे घर के अंदर कोई है…”

रिद्धि का दिल तेजी से धड़कने लगा और उसने धीरे से कमरे का दरवाजा खोला।

पूरा घर अंधेरे में डूबा हुआ था लेकिन नीचे किचन से किसी के बर्तन छूने की हल्की आवाज़ साफ आ रही थी।

वो कांपते हुए सीढ़ियां उतरने लगी और हर कदम के साथ उसकी सांसें भारी होती जा रही थीं।

जैसे ही वो किचन के पास पहुंची, उसे लगा कोई इंसान अंधेरे में खड़ा उसे घूर रहा है।

अचानक लाइट जल उठी और सामने इंस्पेक्टर नीरज खड़ा था।

रिद्धि ने राहत की सांस ली लेकिन अगले ही पल उसकी नजर नीरज के हाथ पर गई जहां वही मास्क लटक रहा था जो वीडियो में दिखाई दिया था।

रिद्धि की आंखें फैल गईं और उसका पूरा शरीर सुन्न पड़ गया।

नीरज हल्का सा मुस्कुराया और बोला कि लोग हमेशा इंटरनेट पर अजनबियों से डरते हैं, जबकि असली खतरा अक्सर वही होता है जिस पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जाए।

रिद्धि पीछे हटने लगी लेकिन नीरज ने धीरे से दरवाजा लॉक कर दिया।

उसकी आंखों में अब पुलिस ऑफिसर वाली शांति नहीं, बल्कि एक खतरनाक सनक दिखाई दे रही थी।

तभी अचानक पीछे की खिड़की का शीशा टूटा और अर्णव अंदर कूद आया।

उसने बिना सोचे नीरज पर हमला कर दिया और पूरा किचन लड़ाई की आवाज़ों से भर गया।

नीरज ने चाकू निकाल लिया लेकिन अर्णव ने किसी तरह उसे दीवार से दे मारा।

इसी अफरा-तफरी में रिद्धि ने पास पड़ा गर्म पानी का बर्तन उठाकर नीरज के चेहरे पर फेंक दिया।

नीरज दर्द से चीखा और उसी दौरान पुलिस की दूसरी टीम अंदर घुस आई।

असल में अर्णव ने पहले ही नीरज पर शक होने के बाद उसका फोन ट्रैक करना शुरू कर दिया था।

नीरज गिरफ्तार हो चुका था लेकिन जाते-जाते वो सिर्फ हंस रहा था।

उसने मुड़कर रिद्धि से कहा कि कुछ कहानियां खत्म नहीं होतीं… सिर्फ नया शिकार ढूंढ लेती हैं।

तीन महीने बाद रिद्धि ने अपना नया पॉडकास्ट अपलोड किया।

उसने पहली बार अपनी खुद की कहानी सुनाई, लेकिन रिकॉर्डिंग खत्म करते वक्त उसकी आवाज़ फिर धीमी पड़ गई क्योंकि स्क्रीन पर एक नया मैसेज चमक रहा था —

“लास्ट सीन ऑनलाइन…”

 भूतिया हवेली का इश्क एक ऐसी हवेली… जहाँ आधी रात के बाद सिर्फ चीखें नहीं, अधूरा प्यार भी भटकता है।

भाग – 2 रिद्धि

रिद्धि की आंखें फोन स्क्रीन पर जमी रह गईं और उसके हाथों से कॉफी मग धीरे-धीरे नीचे गिरकर टूट गया।

तीन महीने पहले जिस nightmare से वो किसी तरह बाहर निकली थी, वही डर एक बार फिर उसके सामने खड़ा था जैसे किसी ने अंधेरे को दोबारा जिंदा कर दिया हो।

उसने तुरंत मैसेज खोलने की कोशिश की लेकिन स्क्रीन अपने आप ब्लैक हो गई।

कुछ सेकंड बाद फोन में फ्रंट कैमरा ऑन हुआ और उसमें सिर्फ उसका डरा हुआ चेहरा दिखाई दे रहा था, जैसे कोई दूसरी तरफ बैठा उसकी हर सांस महसूस कर रहा हो।

रिद्धि ने कांपते हाथों से अर्णव को कॉल किया लेकिन कॉल नहीं लगी।

हर बार सिर्फ अजीब सी डिजिटल आवाज़ सुनाई देती, जैसे किसी ने नेटवर्क नहीं बल्कि पूरी बातचीत को कंट्रोल कर लिया हो।

बाहर बारिश शुरू हो चुकी थी और स्टूडियो की बड़ी कांच वाली खिड़कियों पर पानी की बूंदें डरावनी आवाज़ पैदा कर रही थीं।

रिद्धि ने खुद को संभालने की कोशिश की क्योंकि वो जानती थी कि अगर इस बार उसने डर को खुद पर हावी होने दिया, तो शायद वो जिंदा नहीं बचेगी।

तभी उसके लैपटॉप पर अपने आप एक लाइव स्ट्रीम खुल गई।

वीडियो में अर्णव दिखाई दे रहा था, उसके हाथ पीछे बंधे हुए थे और चेहरे पर खून फैला हुआ था जैसे किसी ने बुरी तरह पीटा हो।

रिद्धि की सांसें रुक गईं क्योंकि वीडियो पूरी तरह लाइव था।

अर्णव कैमरे की तरफ देखकर कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसके मुंह पर टेप लगी हुई थी और पीछे कोई आदमी धीमे-धीमे हंस रहा था।

फिर स्क्रीन पर टेक्स्ट उभरा — “इस बार पुलिस मत बुलाना…”

उसके नीचे एक लोकेशन फ्लैश हुई जो दिल्ली के बाहर बंद पड़े एक पुराने सिनेमा हॉल की थी।

रिद्धि बिना समय गंवाए वहां निकल गई क्योंकि उसके दिमाग में सिर्फ अर्णव था।

पूरी सड़क सुनसान थी और बारिश की वजह से हर स्ट्रीट लाइट धुंधली दिखाई दे रही थी, जिससे रास्ता किसी हॉरर फिल्म जैसा लग रहा था।

करीब चालीस मिनट बाद वो उस पुराने सिनेमा हॉल के सामने पहुंची।

जगह पूरी तरह वीरान थी, टूटी दीवारों पर पुराने पोस्टर लटक रहे थे और अंदर से हल्की पीली रोशनी बाहर आ रही थी।

रिद्धि धीरे-धीरे अंदर गई और हर कदम के साथ उसके जूतों की आवाज़ पूरे हॉल में गूंज रही थी।

अचानक पीछे का दरवाजा अपने आप बंद हो गया और पूरा हॉल अंधेरे में डूब गया।

कुछ सेकंड बाद प्रोजेक्टर अपने आप ऑन हुआ और बड़ी स्क्रीन पर वीडियो चलने लगा।

वीडियो में रिद्धि खुद दिखाई दे रही थी, लेकिन ये कोई पुरानी रिकॉर्डिंग नहीं थी… वो लाइव थी।

कैमरे में अभी भी वही सिनेमा हॉल दिखाई दे रहा था और स्क्रीन पर रिद्धि खुद को अंदर चलते हुए देख रही थी।

उसका दिल तेजी से धड़कने लगा क्योंकि इसका मतलब था कि किलर इस वक्त भी उसी हॉल में मौजूद था।

फिर स्पीकर पर एक आवाज़ गूंजी — “तुम्हें पता है सबसे मजेदार चीज़ क्या होती है?”

आवाज धीमी और बेहद शांत थी, लेकिन उसमें ऐसा पागलपन छिपा था जो इंसान की रीढ़ तक ठंडी कर दे।

“जब कोई इंसान खुद चलकर अपनी मौत के पास आता है…”

ये सुनते ही रिद्धि ने पीछे मुड़कर देखा लेकिन पूरा हॉल खाली था और सिर्फ सीटों के बीच अंधेरा फैला हुआ था।

तभी ऊपर बालकनी से किसी चीज़ के गिरने की आवाज़ आई।

रिद्धि दौड़कर ऊपर पहुंची और वहां देखकर उसकी चीख निकल गई क्योंकि अर्णव कुर्सी से बंधा पड़ा था और उसके नीचे टाइमर लगा बम टिक-टिक कर रहा था।

टाइमर में सिर्फ सात मिनट बचे थे।

अर्णव की आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था लेकिन वो बार-बार सिर हिलाकर रिद्धि को वहां से भागने का इशारा कर रहा था।

रिद्धि उसके पास दौड़ी और रस्सियां खोलने लगी लेकिन तभी पीछे से ताली बजने की आवाज़ आई।

अंधेरे से धीरे-धीरे एक आदमी बाहर आया जिसने हूबहू इंस्पेक्टर नीरज वाला मास्क पहना हुआ था।

रिद्धि कुछ सेकंड तक उसे घूरती रही क्योंकि असली नीरज तो जेल में था।

फिर उस आदमी ने मास्क उतारा और रिद्धि का पूरा शरीर सुन्न पड़ गया क्योंकि वो चेहरा उसने पहले भी देखा था।

वो नीरज का छोटा भाई करण था। एक साइबर इंजीनियर, जिसके बारे में पुलिस को कभी पता ही नहीं चला क्योंकि हर बार नीरज अकेला ही सामने आया था।

करण हल्का सा मुस्कुराया और बोला कि नीरज सिर्फ शिकारी था, लेकिन असली खेल हमेशा उसने बनाया था।

उसने बताया कि वो बचपन से लोगों की जिंदगी को कंट्रोल करने का जुनून रखता था और इंटरनेट ने उसे वो ताकत दे दी जिसकी उसे तलाश थी।

रिद्धि लगातार रस्सियां खोलने की कोशिश कर रही थी लेकिन टाइमर तेजी से कम हो रहा था।

करण आराम से सीट पर बैठ गया जैसे वो कोई फिल्म देख रहा हो और बोला कि आज की कहानी का अंत दुखद होना चाहिए।

अचानक अर्णव ने पूरी ताकत से कुर्सी समेत करण पर छलांग लगा दी।

दोनों नीचे गिर पड़े और उसी अफरा-तफरी में रिद्धि ने बम का टाइमर निकालने की कोशिश शुरू कर दी।

उसके हाथ कांप रहे थे और स्क्रीन पर सिर्फ डेढ़ मिनट बचा था।

अर्णव और करण के बीच भयंकर लड़ाई चल रही थी, कुर्सियां टूट रही थीं और पूरे हॉल में चीखें गूंज रही थीं।

तभी करण ने चाकू निकाल लिया और अर्णव के कंधे में घोंप दिया।

रिद्धि चीख उठी लेकिन उसी पल उसकी नजर बम के नीचे लगी वायरिंग पर गई जहां एक छोटा डिजिटल लॉक ब्लिंक कर रहा था।

उसे अचानक याद आया कि करण साइबर इंजीनियर था और उसे पजल्स का जुनून था।

रिद्धि ने जल्दी से कोड पैटर्न समझा और आखिरी दस सेकंड में सही वायर काट दी।

पूरा हॉल अचानक शांत हो गया।

टाइमर रुक चुका था लेकिन उसी समय अर्णव ने करण को जोर से धक्का दिया और वो बालकनी की टूटी रेलिंग से नीचे गिर गया।

नीचे गिरते ही करण की गर्दन अजीब तरीके से मुड़ी और उसकी सांस वहीं रुक गई।

बारिश की आवाज़ फिर से पूरे सिनेमा हॉल में गूंजने लगी लेकिन इस बार डर से ज्यादा थकान महसूस हो रही थी।

रिद्धि भागकर अर्णव के पास गई और उसे कसकर गले लगा लिया।

उसकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे क्योंकि कुछ मिनट पहले तक उसे लगा था कि वो उसे हमेशा के लिए खो देगी।

अर्णव दर्द में भी हल्का सा हंसा और बोला कि उसकी जिंदगी में डेट्स कम, मौत के ट्रैप ज्यादा हैं।

रिद्धि रोते-रोते हंस पड़ी क्योंकि शायद डर के बाद इंसान सबसे ज्यादा प्यार को महसूस करता है।

दो महीने बाद…

रिद्धि ने अपना पॉडकास्ट हमेशा के लिए बंद कर दिया।

अब वो सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रही थी क्योंकि कुछ कहानियां इंसान को मशहूर नहीं, अंदर से खोखला बना देती हैं।

एक रात वो और अर्णव घर की बालकनी में बैठे बारिश देख रहे थे।

सब कुछ आखिरकार शांत लग रहा था, जैसे nightmare सच में खत्म हो चुका हो।

लेकिन तभी रिद्धि के लैपटॉप पर अचानक कैमरा अपने आप ऑन हुआ।

स्क्रीन पर सिर्फ एक नई लाइन टाइप हुई —

“सीजन 3 जल्द शुरू होगा…”

 भूतिया हवेली का इश्क एक ऐसी हवेली… जहाँ आधी रात के बाद सिर्फ चीखें नहीं, अधूरा प्यार भी भटकता है।

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